एक ब्लॉगर के लिए अपनी वेबसाइट या ब्लॉग की वेब ट्रैफिक, एस.ई.ओ. और पेज व्यूज़ की जानकारी रखना सबसे अहम होता है। क्या आपका सामना कभी इन शब्दों से हुआ है- पेज, साइट पर कुल समय और बाउंस रेट (Daily page views, Total time on site & Bounce rate) आदि| आइए हम बताते हैं कि बाउंस रेट क्या होता है ?
जिस प्रकार किसी नए व्यक्ति से मिलने के बाद हमें उस व्यक्ति का पहला प्रभाव (First Impression) बहुत ही आकर्षक लगता है ठीक उसी तरह इंटरनेट की दुनिया में भी कई बार इसी तरह के अनुभवों से सामना करना पड़ा है। जब हम किसी वेबसाइट या ब्लॉग को पहली बार देखते हैं और यदि हमें वह पसंद आता है तो हम उसे बार-बार देखना चाहते हैं या फिर हम उसे ई-मेल द्वारा सब्सक्राइब कर लेते हैं। इसके विपरीत कई बार कुछ वेबसाइट ऐसी भी होती हैं जिन्हें हम एक बार देखने के बाद दोबारा नहीं देखते क्योंकि वो हमें न तो प्रभावित कर पाती है और न ही उस पर हमें अपने काम की चीज मिलती हैं।
एक सफल वेबसाइट या ब्लॉग बनाने के लिए इन बातों को काफी गंभीर से लेने की ज़रूरत है। यदि आपकी वेबसाइट पर बाउंस रेट अधिक आ रहा है तो आपको इस पर ध्यान देना चाहिए कि वो कौन से कारण हो सकते हैं जिसके कारण पाठको (रिडर्स) को आपकी वेबसाइट आकर्षित और प्रभावित नहीं कर पा रही है और ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनमें सुधार किया जा सकता है। जिस प्रकार से एक अच्छा व्यक्तित्व दूसरों को प्रभावित और आकर्षित करता है उसी प्रकार एक वेबसाइट या ब्लॉग का डिज़ाइन आकर्षक, व्यवस्थित, उपयोगी और पाठकों को समझ आने वाला होना चाहिए यदि ऐसा है तो यह पाठकों को आपसे जोड़े रखने में सहायता करता है।
ध्यान रहें - अगर आपके ब्लॉग या साइट में पाठकों (रिडर्स) की संख्या और रुचि बढ़ेगी तो समझ लीजिए बाउंस रेट घट जाएगा। जितना बाउंस रेट नीचे उतना ही आपके साइट के लिए फायदेमंद होगा।